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सड़क गड्ढों का बढ़ता खतरा: पांच साल में हजारों जानें गईं, यूपी में सबसे ज्यादा असर

नई दिल्ली। देश में सड़क हादसों की एक बड़ी वजह के रूप में गड्ढे तेजी से सामने आए हैं। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में गड्ढों से जुड़े दुर्घटनाओं में 9,438 लोगों की मौत हुई है। यह स्थिति सड़क रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2020 से 2024 के बीच गड्ढों के कारण होने वाली मौतों में 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में सबसे अधिक प्रभावित राज्य Uttar Pradesh रहा, जहां कुल 5,127 लोगों की जान गई। वर्ष 2024 में अकेले राज्य में 1,369 मौतें दर्ज की गईं, जो राष्ट्रीय आंकड़े का बड़ा हिस्सा हैं।

वार्षिक आंकड़े दर्शाते हैं कि 2020 में 1,555 लोगों की मौत हुई थी। 2021 में यह संख्या घटकर 1,481 रही, लेकिन इसके बाद लगातार वृद्धि हुई। 2022 में 1,856, 2023 में 2,161 और 2024 में 2,385 मौतें दर्ज की गईं, जो पांच साल में सबसे अधिक हैं।

अन्य राज्यों में भी हालात चिंताजनक रहे। Madhya Pradesh में इस अवधि के दौरान 969 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 2024 में 277 शामिल हैं। Tamil Nadu में 612 और Punjab में 414 लोगों की जान गई।

इन पांच वर्षों में गड्ढों से संबंधित 23,056 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 19,956 लोग घायल हुए, जबकि 9,670 को गंभीर चोटें आईं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और रखरखाव केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है, जबकि अन्य सड़कों की देखरेख संबंधित राज्य सरकारों के अधीन आती है। उन्होंने बताया कि सड़क नेटवर्क के रखरखाव को प्राथमिकता देने और समय पर मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए तंत्र मजबूत किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की समय पर मरम्मत, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय किए बिना हादसों में कमी लाना मुश्किल होगा। बढ़ते आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।

 

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